Monday, May 4, 2020

बौद्ध धर्म(Light of Asia)

बौद्ध धर्म(Light of Asia)
                                                             बौद्ध धर्म  
  • बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे इन्हे एशिया का ज्योति पुञ्ज (Light of Asia) कहा जाता है 
  • गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था 
  • इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था 
  • इनके पिता का नाम शुद्धोधन ओर माता का नाम मायादेवी था 
  • इनके पिता शाक्य गण के मुखिया थे 
  • गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा के साथ हुआ इनके पुत्र का नाम राहुल था 
  • सिद्धार्थ जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने निम्न चार दृश्यों को क्रमशः देखा 1. बूढ़ा व्यक्ति 2. एक बीमार व्यक्ति 3. शव 4. एक सन्यासी 
  • सांसारिक समस्याओ से व्यथित होकर सिद्धार्थ ने 29  वर्ष  की उम्र में गृह त्याग कर  दिया  था जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया 
  • सिद्धार्ध के प्रथम गुरु आलारकलाम थे 
  • आलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रुद्रकारामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की 
  • 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ 
  • ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए ओर वह स्थान बोधगया कहलाया 
  • बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिसे बौद्ध ग्रंथो में धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया 
  • बुद्ध ने अपने उपदेश पालि भाषा में दिए 
  • बुद्ध ने अपने सर्वाधिक उपदेश कौशल देश की राजधानी श्रावस्ती में दिए 
  • इनके प्रमुख अनुयायी शासक थे- बिम्बिसार , प्रसेनजित व उदयिन 
  • बुद्ध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था में 483 ईसा पूर्व में कुशीनारा (देवरिया उत्तर प्रदेश ) में चुन्द द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गयी जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया 
  • मल्लो ने अत्यन्त सम्मानपूर्वक बुद्ध का अन्त्येष्टि संस्कार किया 
  • बौद्ध धर्म के बारे में हमे विशद ज्ञान त्रिपिटक (विनयपिटक , सूत्रपिटक , अभिदम्भपिटक )से प्राप्त होता है तीनो पिटको की भाषा पालि है 

Thursday, April 9, 2020

प्रत्यास्थता (Elasticity)किसे कहते है,प्रत्यास्था की सीमा (Limit of Elasticity),प्रतिबल , विकृति तथा हुक का नियम:

प्रत्यास्थता (Elasticity)किसे कहते है,प्रत्यास्था की सीमा (Limit of Elasticity),प्रतिबल , विकृति तथा हुक का नियम:
                                        
 प्रत्यास्थता (Elasticity): 
जब हम किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाते है तो वस्तु का आकार अथवा रूप अथवा दोनों ही बदल जाते है इस बल को 'विरूपक बल 'कहते है इसे हटा लेने पर वस्तु फिर अपना प्रारंभिक आकार अथवा रूप ले लेती है उदहारण के लिए , जब हम रबड़ की डोरी के एक सिरे को एक हाथ में पकड़ कर दूसरे सिरे को दूसरे हाथ से खींचते है तो डोरी की लम्बाई बढ़ जाती है , परन्तु छोड़ देने पर डोरी फिर अपनी पहली लम्बाई ले लेती है पदार्थ के इस गुण को प्रत्यास्थता कहते है तथा जिस वस्तु में यह गुण पाया जाता है उसे प्रत्यास्थ वस्तु कहते है अतः
                      प्रत्यास्थता किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल के द्वारा उत्पन्न आकार अथवा रूप के परिवर्तन का विरोध करती है और जैसे ही विरूपक बल हटा लिया जाता है वस्तु अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है 
जो वस्तुए विरूपक बल के हटा लिए जाने पर अपनी पूर्व अवस्था को पूर्णतः प्राप्त कर लेती है वे पूर्ण प्रत्यास्थ कहलाती है इसके विपरीत जो वस्तुए विरूपक बल को हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लोटती बल्कि सदैव के लिए विरूपित हो जाती है वे पूर्ण सुघट्य कहलाती है वास्तव में कोई भी वस्तु न तो पूर्ण प्रत्यास्थ होती है और न पूर्ण सुघट्य , बल्कि सभी वस्तुए इन दोनों सीमाओं के भीतर ही होती है फिर भी मोटे तोर पर क्वार्टज को पूर्ण प्रत्यास्थ वस्तु तथा मोम व् गीली मिट्टी को पूर्ण सुघट्य माना जाता है
                                 
प्रत्यास्था की सीमा (Limit of Elasticity): प्रत्यास्थ वस्तुए विरूपक बल के हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है परन्तु वस्तुओ में यह गुण विरूपक बल के एक विशेष मान तक ही रहता है यदि विरूपक बल का मान बढ़ाते जाए तो एक अवस्था ऐसी आएगी जब बल को हटा लेने पर वस्तु अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लौटेगी | उदाहरण के लिए , यदि किसी दृढ़ आधार से लटके तार के निचले सिरे पर भार लटकाया जाए तो तार लम्बाई में बढ़ जाता है भार को हटा लेने पर तार पुनः अपनी प्रारंभिक लम्बाई में आ जाता है यदि लटकाये गये भार को धीरे धीरे बढ़ाया जाए तो एक अवस्था ऐसी आ जाती है कि भार हटा लेने पर तार अपनी प्रारंभिक लम्बाई में नहीं लौटता बल्कि उसकी लम्बाई सदैव के लिए बढ़ जाती है इस प्रकार उसका प्रत्यास्थता का गुण नष्ट हो जाता है किसी पदार्थ पर लगाए गये विरूपक बल की उस सीमा को जिसके अन्तर्गत पदार्थ का प्रत्यास्थता का गुण विद्यमान रहता है उस पदार्थ की प्रत्यास्थता की सीमा कहते है

मानव रोग एवं उससे प्रभावित अंग

प्रतिबल , विकृति तथा हुक का नियम:
                   प्रतिबल (Stress): जब किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाकर उसके आकार अथवा रूप में परिवर्तन किया जाता है तो उस वस्तु की प्रत्येक काट पर , बाह्य बल के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में एक आन्तरिक प्रतिक्रिया -बल उत्पन्न हो जाता है जो वस्तु को पूर्व अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है साम्यावस्था में वस्तु की अनुप्रस्थ-काट के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आन्तरिक प्रतिक्रिया-बल को प्रतिबल कहते है 
परन्तु चूँकि सन्तुलन की अवस्था में आन्तरिक प्रतिक्रिया-बल का मान बाह्य बल के बराबर है , अतः यदि किसी वस्तु के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल A पर बाह्य बल F लगाया गया है तो
                                                                         
                                                           प्रतिबल = F/A
प्रतिबल का मात्रक न्यूटन/वर्ग मीटर है
वस्तु में उत्पन्न प्रतिबल इस बात पर निर्भर करता है की वस्तु पर बाह्य बल किस प्रकार लगाया है इस आधार पर प्रतिबल तीन प्रकार के होते है
1. अनुदैर्ध्य  प्रतिबल Longitudinal stress
2.अभिलम्ब प्रतिबल Normal stress
3. स्पर्श-रेखीय प्रतिबल Tangentialstress
                     विकृति (Strain): जब किसी वस्तु पर बाह्य बल लगने से वस्तु के आकार अथवा रूप में परिवर्तन हो जाता है तब वस्तु विकृत अवस्था में कही जाती है वस्तु के एकांक आकार में होने वाले परिवर्तन को विकृति कहते है जैसे किसी तार पर भार लटकाने से उसकी लम्बाई बढ़ जाती है लम्बाई में होने वाली वृद्धि तथा प्रारंभिक लम्बाई के अनुपात को विकृति कहते है चूँकि विकृति एक अनुपात है अतः इसका कोई मात्रक नही होता है
       वस्तु पर विरूपक बल लगने के अनुसार विकृति भी तीन प्रकार की होती है
1. अनुदैर्ध्य विकृति Longitudinal strain
2. आयतन विकृति Volume strain
3. अपरूपण विकृति Shearing strain
                     हुक का नियम (Hook's Law): सन 1679 में राबर्ट हुक ने यह बताया कि लघु विकृतियों की सीमा के भीतर , पदार्थ में उत्पन्न विकृति पदार्थ पर कार्यरत प्रतिबल के अनुक्रमानुपाती होती है | किसी दी हुई वस्तु के पदार्थ के लिए प्रतिबल तथा विकृति का अनुपात एक नियतांक होता है इसे प्रत्यास्थता गुणांक E कहते है 
                                                                
                                                          E= प्रतिबल /विकृति 

Saturday, March 28, 2020

science topics,MCQ Question in hindi

science topics,MCQ Question in hindi
1. आवर्त सारणी में आवर्तो की संख्या - 7
2. आवर्त सारणी में वर्गो की संख्या - 18
3. आवर्त सारणी की कुल गैसो की संख्या - 11
4. सबसे भारी धातु - ओस्मियम
5. सबसे हल्की धातु - लीथियम
6. सबसे अधिक गैसो वाला वर्ग - 18 वा वर्ग या शून्य वर्ग
7. सबसे भारी गैस - रेडॉन
8. वायुमण्डल में नहीं पायी जाती - रेडॉन
9. अक्रिय गैसों में मुक्त इलैक्ट्रॉनों की संख्या - शून्य
10. आवर्त सरणी में सबसे क्रियाशील अधातु - फ्लोरीन
11. सर्वाधिक आयनन वाला तत्व - हीलियमफ 
12. न्यूनतम आयनन विभव वाला तत्व - सीजियम
13. विधुत का सुचालक अधातु - ग्रेफाइट
14. पौधो के पर्ण में पाया जाने वाला धातु तत्व - मैग्नीशियम
15. आवर्त सारणी में सार्वधिक बंधुता वाला तत्व - क्लोरीन 
16. आधुनिक आवर्त सारणी की खोज की - मोजले ने
17. सबसे कमजोर बल होता है - गुरुत्वाकर्षण बल
18. सबसे मजबूत बल होता है - नाभिकीय बल
19. सांस की दुर्गन्ध को जाना जाता है - हैलिटोसिस
20. तांबा का अयस्क होता है - मेलेकाइट 
21. आधुनिक आवर्त सारणी में गैर धातुओं की संख्या - 20 
22. आधुनिक आवर्त सारणी में धातुओं की संख्या - 91
23. लैंथेनॉइड्स तत्वों की संख्या - 14
24. एक्टेनाइड्स तत्वों की संख्या - 14
25. लैंथेनॉइड्स किस ब्लॉक से सम्बंधित है - F ब्लॉक से
26. लैंथेनम किस ब्लॉक से सम्बंधित है - D ब्लॉक से
27. एक्टिनाइड्स किस ब्लॉक से सम्बंधित है - F ब्लॉक से
28. एक्टीनियम किस ब्लॉक से सम्बंधित है - D ब्लॉक से
29. पारे की परमाणु संख्या - 80
30. सोने Ag की परमाणु संख्या - 79 
31. लेड Pb की परमाणु संख्या - 82 
32. संक्रमण धातु कहा जाता है - D ब्लॉक तत्वों को
33. बेकिंग पाउडर मिश्रण है - बेकिंग सोड़ा +टार्टरिक अम्ल
34. PH का पता लगाया - शॉरेन्सन ने 
35. क्विक सिल्वर कहा जाता है - मर्करी को
36. सोल्डर या रांगा मिश्रधातु है - शीशा और टिन
37. सीमेंट में होता है - ट्राई कैल्सियम सिलिकेट
38. ब्लीचिंग पाउडर की प्रकृति होती है - आक्सीकारक अभिकर्मक
39. धातु और अधातु में किसने बांटा - लेवोजियर ने
40. त्रिक नियम किसने दिया - डोबेराइनर ने
41. अष्टक नियम किसने दिया - न्यूलैंड्स ने
42. मेंडलीव की आवर्त सारणी में तत्वों की संख्या - 63 
43. तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आधार पर रखा - मेंडलीव ने
44. आवर्त सारणी का जनक कहा जाता है - मेंडलीव को
45. न्यूलैंड्स का अष्टक नियम किस तत्व तक लागू होता है - कैल्सियम तक
46. सबसे अच्छा अघातवर्ध्य धातु - सोना 
47. सबसे अधिक तन्यता वाला धातु - सोना 
48. विधुत ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक - चाँदी
49. अधातु जो द्रव है - ब्रोमीन 
50. धातुओं का गलनांक सामान्यता होता है - उच्च 
51. सबसे कम गलनांक वाली धातु - गैलियम और सीजियम
52. चाकू से काटी जा सकने वाली धातु - सोडियम , लिथियम , पोटैशियम
53. कम घनत्व की वजह से पानी पर तैरने वाली धातु - सोडियम , लिथियम , पोटैशियम
54. धातुओं का घनत्व अधिक होता है - सोडियम , लिथियम , पोटैशियम को छोड़कर
55. जब कॉपर को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो यह आक्सीजन के साथ मिलकर काले रंग का पदार्थ बनाता है जो कहलाता है - क्युप्रिक आक्साइड
56. अत्यंत अधिक ताप पर भी आक्सीजन के साथ अभिक्रिया नही करते है - सोना और चाँदी 
57. एल्युमिनियम पर मोटी आक्साइड की परत बनने की प्रक्रिया को क्या कहते है जो इसे संरक्षण से भी बचाती  है - एनोडीकरण
58. साधारणतः धातु +तनु अम्ल अभिक्रिया कर बनाते है - लवण 
59. प्रबल आक्सीकारक है - नाइट्रिक अम्ल
60. धातुए किससे अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं करती है - नाइट्रिक अम्ल
61. सोना और प्लेटिनम को गला सकता है - अम्लराज या एकवारजिया
62. किस धातु को उसके अयस्क से वायु में गर्म करके प्राप्त किया जा सकता है - Hg मरकरी 
63. जब सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिती में अधिक ताप पर गर्म किया जाता है तो यह आक्साइड में            परिवर्तित  हो जाता है इस प्रक्रिया को कहते है - भर्जन 
64. धातु के आक्साइड से धातु को प्राप्त करने के लिए किसका उपयोग अपचायक के रूप में होता है - कार्बन 
65. खुली वायु में कुछ दिन छोड़ देने पर सिल्वर की वस्तुए काली हो जाती है उनकी सतह पर किसकी परत बन        जाती है - सिल्वर सल्फाइड 
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); 66. आवर्त सारणी में दुर्लभ मृदा धातुओं की संख्या -  17
67. सामान्यतः आवर्त सारणी में बाये से दाये जाने पर आयनीकरण ऊर्जा - बढ़ती है 
68. आवर्त सारणी में न्यूनतम आयनीकरण ऊर्जा होती है - सीजियम की
69. आवर्त सारणी में अधिकतम आयनीकरण ऊर्जा होती है - हीलियम की
70. आवर्त सारणी में बाये से दाये जाने पर विद्युतऋणात्मकता - बढ़ती है 

Saturday, March 21, 2020

विभिन्न यंत्रो और उपकरणों के आविष्कारक ,

विभिन्न यंत्रो और उपकरणों के आविष्कारक ,
उपकरण                  आविष्कारक 

बैरोमीटर -                ई टोरसेली
बाईसिकल -             के. मैकमिलन
कम्प्यूटर -                चाल्स बैवेज
मशीन गन -             सर जेम्स पकल
पनडुब्बी -               डेविड बुसनेल
वाशिंग मशीन -       हार्ले मशीन कम्पनी
ट्रांसफार्मर -            माइकल फैराडे
थर्मामीटर -             डेनियल गैब्रियल फॉरेनहाइट
ट्रांजिस्टर -              जॉन बरडीन, विलियम शाकले
टाइपराइटर -          पेलग्रीन टेरी
टेलीविजन -            जे. एल. बेयर्ड
टेलीफोन -              ग्राम बेल
टैंक -                     सर अर्नेस्ट स्विटन
सौर मण्डल -          कॉपरनिकस
थर्मस फ्लास्क -      डेवार
लिफ्ट -                  इलिसा ओटिस
लेसर -                   थियोडर मेमैन
रिवाल्वर -              सैमुअल कोल्ट
रबर फोम -            डनलप रबर कम्पनी
रेफ्रिजरेटर -           हैरिसन व टिनिंग
सेफ्टिलैम्प -            हम्फ्रे डेवी
स्टीम इंजन -           जेम्स वाट
स्टील -                    हेनरी बेसेमर
सेफ्टी पिन -            वालटर हंट
नायलॉन -               डॉ. वालेस कैरायर्स
लाउडस्पीकर -       होरेस शार्ट
ग्रामोफोन -             थॉमस अल्वा एडीसन
ग्लाइडर -               जार्ज कैले
गैल्वेनोमीटर -         एंड्रे मेरी एम्पियर
फाउण्टेनपेन -        लेविस वाटरमैन
डायनेमो -              माइकल फैराडे
डीजल इंजन -        रुडोल्फ डीजल
घड़ी (पेंडुलम ) -    क्रिशचियन ह्यूगेंस
क्रेस्कोग्राफ -         जे. सी. बोस
डायोड वाल्व -       सर जे. एस. फ्लेमिंग
ट्रायोड वाल्व -       डॉ. ली. डी. फारेस्ट
डायनामाइट -        एल्फ्रेड नोबेल
नाभिकीय रिएक्टर - एनरिको फर्मी
परमाणु बम -           ऑटोहान
परमाणु -                 जॉन डॉल्टन
इलेक्ट्रॉन -               जे. जे. थामसन
रेडियम -                 मैडम क्यूरी
रेडियो ऐक्टिवता -    हेनरी बेकुरल
रमन प्रभाव -           सी. वी. रमन
एक्स किरणे -          विल्हेम रॉन्जन
प्रकाश विधुत प्रभाव - अल्बर्ट आइस्टीन
तापायनिक उत्सर्जन - एडीसन 

Wednesday, March 18, 2020

मानव रोग और उससे प्रभावित अंग/ human diseases,मानव रोग के कारण एवं निवारण PDF

मानव रोग और  उससे प्रभावित अंग/ human diseases,मानव रोग के कारण एवं निवारण PDF
                                      मानव रोग (Human Diseases)  
विषाणुओ (Virus) द्वारा
रोग का नाम              प्रभावित अंग
चेचक -                     सम्पूर्ण शरीर विशेषकर चेहरा तथा हाथ पैर
खसरा -                     सम्पूर्ण शरीर (विशेषकर बच्चो में होता है )
ट्रेकोमा -                    नेत्र
हर्पीस -                      त्वचा श्लेष्मकला
रेबीज हाइड्रोफोबिया - तंत्रिका तंत्र
फ्लू या इन्फ्लुएंजा -       श्वसन तंत्र
गलसुआ -                   पेरोटिड लार ग्रंथिया
पोलियो -                     तंत्रिका तंत्र
एड्स -                        सम्पूर्ण शरीर
डेंगू -                           सम्पूर्ण शरीर में हड्डी तोड़ बुखार

जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा

निमोनिया -                    फेफड़े
टिटनेस -                       तंत्रिका तंत्र तथा माँसपेशिया
हैजा -                            आँत या आहार नाल
डिप्थीरिया -                   श्वास नली
काली खासी -                 श्वसन तंत्र
सिफिलिस -                    जनन  अंग, मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र
प्लेग -                            फेफड़े , लाल रुधिर कणिकाएँ
मेनिन्जाइटिस -               मतिष्क के ऊपर की झिल्लिया , मस्तिष्क
 मियादी बुखार -             आंत का रोग
कुष्ठ (कोढ़ ) -                 त्वचा तथा तंत्रिकाएँ
क्षय रोग -                      शरीर का कोई भी अंग , विशेषकर फेफड़े

प्रोटोजोआ (Protozoa) द्वारा  

पायरिया -                      दांतो की जड़े तथा मसूड़े
दस्त व् आमातिसार -      बड़ी आंत
पेचिश -                        आंत के अगले भाग
मलेरिया -                     लाल रुधिराणु , प्लीहा , यकृत

कवक(fungal) द्वारा

एथलीट  फुट -                त्वचा
दमा -                             फेफड़े
दाद -                             त्वचा
खाज -                            त्वचा

शरीर की बीमारियाँ : एक दृष्टि में  

ट्रेकोमा -                        गुर्दे , आँख
डायबिटीज -                  अग्नाशय
घेंघा -                             थाइराइड ग्रंथि , गला
पर्किसन -                       मस्तिष्क
निमोनिया -                      फेफड़े
टाइफाइड -                    आंत
रिकेटस -                        हड्डिया
सिफिलिस -                    जनन अंग
दस्त -                             बड़ी आंत
काला जार-                      रुधिर , अस्थिमज़्ज़ा
मेनिन्जाइटिस -                रीढ़ की हड्डी तथा मस्तिष्क
पीलिया -                         यकृत
डिप्थीरिया -                    श्वास  नली और गला
हेपेटाइटिस बी -              यकृत