Saturday, September 15, 2018

धारारेखीय प्रवाह, क्रांतिक वेग,सीमान्त वेग की परिभाषा

Dhararekhiy pravah krantik pravah
◆धारा रेखीय प्रवाह(steam line flow): 

द्रव का ऐसा प्रवाह जिसमे द्रव का प्रत्येक कण उसी बिंदु से गुजरता है, जिससे पहले उससे पहले वाला कण गुजरा था, धारा रेखीय प्रवाह कहलाता है। इसमें किसी नियत बिंदु प्रवाह की चाल व दिशा निश्चित बनी होती है।

◆क्रांतिक वेग(critical velocity): 

धारा रेखीय प्रवाह महत्तम वेग को क्रांतिक वेग कहते है।
अर्थात धारा रेखीय प्रवाह की वह उच्च सीमा जिसके बाद द्रव का प्रवाह धारा रेखीय न होकर विक्षुब्ध हो जाये वह वेग क्रांतिक वेग कहलाता है।
●यदि द्रव प्रवाह का वेग क्रांतिक वेग से कम होता है तो उसके प्रवाह उसकी श्यानता पर निर्भर करता है।
यदि द्रव प्रवाह का वेग उसके क्रांतिक वेग से अधिक होता है तो उसका प्रवाह उसके घनत्व पर निर्भर करता है।

◆सीमान्त वेग: 

जब कोई वस्तु किसी श्यान द्रव में गिरती है तो प्रारम्भ में उसका वेग बढ़ता जाता है, परंतु कुछ समय के बाद वह निश्चित वेग से गिरने लगती है इस निश्चित वेग को ही वस्तु का सीमान्त वेग कहते है। इस अवस्था मे वस्तु का भार श्यान बल और उत्तप्लवन बल के बराबर होता है। अर्थात वस्तु पर कार्य करने वाले सभी बालो का योग शून्य होता है।
●सीमान्त वेग वस्तु की त्रिज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात बड़ी वस्तु अधिक वेग से ओर छोटी वस्तु कम वेग से गिरती है

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