Friday, October 12, 2018

राष्ट्रपति के अधिकार एवं कर्तव्य

President ke adhikar

1.नियुक्ति संबंधी अधिकार:-

राष्ट्रपति निम्न की नियुक्ति कर सकता है-
1. भारत का प्रधानमंत्री
2. प्रधानमंत्री की सलाह से मंत्रीपरिषद के अन्य सदस्य
3. सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
4. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक(CAG)
5. राज्यो के राज्यपाल
6. मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त
7. भारत के महान्यायवादी
8. राज्यो के मध्य समन्वय के लिए अंतरराज्य परिषद के सदस्य
9. संघीय लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों
10. भाषा आयोग के सदस्यों
11. पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्यों
12. संघीय क्षेत्रो के मुख्य आयुक्तों
13. वित्त आयोग के सदस्यों
14. अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों
15. अनुसूचित क्षेत्रो के प्रशासन के संबंध में रिपोर्ट देने वाले आयोग के सदस्यों
16. भारत के राजदूतों आदि।

2.विधायी शक्तियां:-

राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग होता है। इसे निम्न विधायी शक्तियां प्राप्त होती है- 1. संसद के सत्र को आहूत करने, सत्रावसान करने तथा लोकसभा भंग करने संबंधी अधिकार। 2. संसद के सदन में या एक साथ सम्मिलित रूप से दोनों सदनों में अभिभाषण करने की शक्ति। 3. लोकसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात प्रथम सत्र के प्रारंभ और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में सम्मिलित रूप से सांसद में अभिभाषण करने की शक्ति।
4. संसद में निम्न विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति जरूरी है- (a) नए राज्यो का निर्माण और ओर वर्तमान राज्यो के क्षेत्रों , सीमाओं या नामो में परिवर्तन संबंधित विधेयक । (b) धन विधेयक (अनुच्छेद 110)। (c) संचित निधि में व्यय करने वाले विधेयक (अनुच्छेद 117) । (d) ऐसे कराधान पर जिसमे राज्य हित जुड़े हो प्रभाव डालने वाले विधेयक। (e) राज्यो के बीच व्यापार , वाणिज्य और समागम पर निर्बन्धन लगाने वाले विधयेक (अनुच्छेद 304) 
6. यदि किसी साधारण विधेयक पर दोनो सदनों में कोई असहमति है तो उसे सुलझाने के लिए राष्ट्रपति दोनो सदनों के संयुक्त बैठक बुला सकता है। (अनुच्छेद 108)।

3.संसद सदस्यों के मनोनयन का अधिकार:-

जब राष्ट्रपति को यह लगे कि लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के व्यक्तियों का समुचित प्रतिनिधित्व नही है तब वह उस समुदाय के दो व्यक्तियों को लोकसभा के सदस्य के रूप में नामांकित कर सकता है (अनुच्छेद 331) । इसी प्रकार वह कला , साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान, सामाजिक कार्यो में पर्याप्त अनुभव एवं दक्षता रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा में नामजद कर सकता है [अनुच्छेद 80(3)] ।

4.अध्यादेश जारी करने की शक्ति:-

संसद के स्थगन के समय अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी कर सकता है। जिसका प्रभाव संसद के अधिनियम के समान होता है। इसका प्रभाव संसद के शुरू होने 6 सप्ताह तक रहता है। परंतु राष्ट्रपति राज्य सूची के विषयों पर अध्यादेश जारी नही कर सकता , जब दोनों सदन सत्र में होते है तब राष्ट्रपति को यह शक्ति नही होती है। 
5.सैनिक शक्ति:-
 सैन्य बालो की सर्वोच्च शक्ति राष्ट्रपति के पास ही होती है किंतु इसका प्रयोग विधि द्वारा नियमित होता है।
6.राजनैतिक शक्ति:-
 दूसरे देशों के साथ कोई भी समझौता या संधि राष्ट्रपति के नाम से ही होती है। राष्ट्रपति विदेशो के लिए भारतीय राजदूतों की नियुक्ति करता है। और भारत मे विदेशो के राजदूतों का अनुमोदन करता है।

7.क्षमादान की शक्ति:-

 संविधान की अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराय गए किसी व्यक्ति के दण्ड को क्षमा करने, प्रविलम्ब, परिहार और लघुगणक की शक्ति प्राप्त है। क्षमा में दंड ओर बंदिकरण दोनो हटा दिया जाता है। लघुगणक में दंड के स्वरूप को बदलकर कम कर दिया जाता है। जैसे मृत्युदंड को कठोर या साधारण कारावास में परिवर्तित कर दिया जाता है। परिहार में दंड की प्रकृति में परिवर्तन किए बिना उसकी अवधि कम कर दी जाती है। जैसे 2 वर्ष के कठोर कारावास को 1 वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर देना। प्रविलम्बन में किसी दंड पर विशेषकर मृत्युदंड पर रोक लगाना है। ताकि दोषी व्यक्ति क्षमा याचना कर सके । विराम में किसी दोषी की सजा को विशेष स्तिथि में कम कर दिया जाता है। जैसे गर्भवती स्त्री की सजा को कम कर देना। 
जब क्षमादान की पूर्व याचिका राष्ट्रपति द्वारा रद्द कर दी गयी हो तो दूसरी याचिका नही दायर की जा सकती है

8.राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां:-

आपातकाल से सम्बंधित उपबंध भारतीय संविधान के भाग 18 के अनुच्छेद- 352 तथा 360 के अंतर्गत मिलता है। मंत्रिपरिषद के परामर्श से राष्ट्रपति तीन प्रकार के आपात लागू कर सकता है-
(a) युद्ध या बाह्म  आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण लगाया गया आपात (अनुच्छेद-352)
(b) राज्यो में संविधानिक तंत्र के विफल होने से उत्त्पन्न आपात (अनुच्छेद- 356 अर्थात राष्ट्रपति शासन)
(c) वित्तीय आपात (अनुच्छेद- 360) न्युनतम अवधि 2 माह
9.राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न का उच्चतम न्यायालय से अनुच्छेद 143 के अधीन परामर्श ले सकता है। लेकिन वह यह परामर्श मानने के लिए बाध्य नही है।
10. राष्ट्रपति की किसी विधेयक पर अनुमति देने या न  देने के निर्णय लेने की सीमा का अभाव होने के कारण राष्ट्रपति जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है। क्योंकि अनुच्छेद 111 केवल यह कहता है, कि राष्ट्रपति यदि विधेयक लौटना चाहता है तो विधयेक को उसे प्रस्तुत किये जाने के बाद यथाशीघ्र लौटा देगा। जेबी वीटो शक्ति के प्रयोग का उदाहरण है, 1986 ईस्वी में संसद द्वारा पारित भारतीय डाकघर संशोधन विधेयक , जिस पर तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कोई निर्णय नही लिया तीन वर्ष पश्चात 1989 ईस्वी में अगले राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने इस विधेयक को नई राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के पास पुनर्विचार हेतु भेजा परन्तु सरकार ने इसे रद्द करने का फैसला लिया। 

   


0 comments: