Tuesday, October 16, 2018

चुम्बकत्व के बारे में कुछ तथ्य

Properties of magnets in hindi chumbkatv ke prakar

● प्राकृतिक चुम्बक लोहे का ऑक्साइड (Fe3O4) होता है। इसका कोई निश्चित आकर नही होता।
● चुम्बक के दो ध्रुवो को मिलने वाली रेखा को चुम्बकीय अक्ष कहते है।
● समान ध्रुव में प्रतिकर्षण और असमान ध्रुव में आकर्षण होता है।
● चुम्बक लोहे को अपनी ओर आकर्षित करता है इस गुण को ही चुम्बकत्व कहते है। चुम्बक के सिरों पर चुम्बकत्व सबसे अधिक होता है तथा चुम्बक के मध्य में चुम्बकत्व नही होता है।
● चुम्बक को क्षेतिज तल में स्वतंत्रपूर्वक लटकाने पर उसका एक ध्रुव उत्तर की ओर तथा दूसरा ध्रुव सदैव दक्षिण की ओर ठहरता है। उत्तर की ओर ठहरने वाले ध्रुव को उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण की ओर ठहरने वाले ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव कहते है।
● चुम्बक चुम्बकीय पदार्थो में प्रेरण द्वारा चुम्बकत्व उत्त्पन्न कर देता है।

चुम्बकीय क्षेत्र:-

   चुम्बक के चारो ओर वह क्षेत्र जिसमे चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता:-
   चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लंबबत एकांक लंबाई का ऐसा चालक तार रखा जाए जिसमे एकांक प्रवलता की धारा प्रवाहित हो रही हो तो चालक पर लगने वाला बल ही चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता की माप होगा। चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता एक सदिश राशि है इसका मात्रक न्यूटन/ एम्पियर- मी. अथवा वेबर/मी.^2 या टेस्ला होता है।
चुम्बकीय बल की रेखाएं:-
    चुम्बकीय क्षेत्र में बल रेखाएं वे काल्पनिक रेखाएं है जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है । चुम्बकीय बल रेखा की किसी भी बिंदु पर खिंची गयी स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है।
चुम्बकीय बल रेखाओ के गुण:
1. चुम्बकीय बल रेखाएं सदैव चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती है, तथा वक्र बनाती हुई पुनः उत्तरी  ध्रुव में प्रवेश कर जाती है और चुम्बक के अंदर से होती हुई पुनः उत्तरी ध्रुव पर वापस आ जाती है।
2. दो बल रेखाएं एक दूसरे को कभी नही काटती ।
3. चुम्बकीय क्षेत्र जहा प्रबल होता है वहाँ बल रेल्हाये पास पास गोटी है। 
4. एक समान चबकीय क्षेत्र की बल रेखाएं परस्पर समांतर और बराबर दूरियों पर होती है।

चबकीय पदार्थ:-

1. प्रति चुम्बकीय पदार्थ-
 प्रति चबकीय पदार्थ वे पदार्थ होते है जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में चुम्बकित हो जाते है । जस्ता, विस्मिथ, तांबा, चांदी, हीरा, नमक आदि प्रति चुम्बकीय पदार्थो के उदाहरण है।
2. अनुचुम्बकीय पदार्थ-
 अनुचुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ होते है जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की दिशा में थोड़े से चुम्बकित हो जाते है। प्लेटिनम, क्रोमियम, सोडियम, ऑक्सीजन आदि।
3. लौह चुम्बकीय-
  लौह चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ होते है जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते है। लोहा, निकल, इस्पात आदि।

डोमेन:-

लौह चुम्बकीय पदार्थ में प्रत्येक परमाणु ही चुम्बक होता है और उनमें असंख्य परमाणुओं के समूह होते है जिन्हें डोमेन कहा जाता है। एक डोमेन में 10^18 से 10^21 तक परमाणु होते है। लौह चुम्बकीय पदार्थो का चुम्बकत्व इन डोमेन के कारण ही होता है।

क्यूरी ताप:-

 क्यूरी ताप वह ताप है जिसके ऊपर पदार्थ अनुचुम्बकीय व जिसके नीचे पदार्थ लौह चुम्बकीय होता है। लोहा और निकल के लिए क्यूरी ताप के मान 770०℃ तथा 358℃ होता है।
● अस्थाई चुम्बक बनाने के लिए नर्म लोहे का प्रयोग किया जाता है तथा स्थाई चुम्बक बनाने के लिए इस्पात का प्रयोग किया जाता है।
भू-चुम्बकत्व:
  किसी स्थान पर पृथ्वी की चुम्बकीय क्षेत्र को तीन तत्वों द्वारा व्यक्त किया जाता है- दिकपात कोण, नमन कोण , चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेतिज घटक।
दिकपात कोण-
किसी स्थान पर भौगोलिक यामियोत्तर तथा चुम्बकीय यामियोत्तर के बीच के कोण को दिकपात कोण कहते है।
नमन कोण-
 किसी स्थान पर पृथ्वी का संपूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र क्षेतिज तल के साथ जितना कोण बनाता है उसे उस स्थान का नमन कोण कहते है।
चुम्बकीय क्षेत्र के क्षेतिज घटक: 
पृथ्वी के सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र के क्षेतिज घटक अलग अलग स्थानों पर अलग अलग होता है। परंतु इसके मान लगभग 0.4 गोस या 0.4×10^ -4 टेस्ला होता है।

 

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