Monday, October 1, 2018

धर्मग्रंथ और ऐतिहासिक ग्रंथ, वेदों की जानकारी

Vedo ke baare me mahattvapoorn jankari
वेद चार है- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। इन चारों वेदों को संहिता कहा जाता है।

ऋग्वेद:-

● ऋचाओ के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त (वालखिल्य पाठ के 11 सूक्तो सहित) और 10,462 ऋचाइये है। इस वेद से आर्य के राजनीतिक प्रणाली और इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।
● विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है। इसके 9 वे मंड़ल में सोम देवता का उल्लेख है।
● इसके 8वे मंड़ल में हाथ से लिखी ऋचाओ को खिल कहा जाता है।
● चातुस्वर्णय समाज की कल्पना का आदि स्रोत ऋग्वेद के 10वे मंडल में वर्णित पुरुषसूक्त है। इसके अनुसार चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शुद्र) आदि पुरुष ब्रम्हा के क्रमशः मुख, भुजाओ, जंघाओं, और चरणों से उत्त्पन्न हुए है।
    धर्मसूत्र चार जातियों की स्तिथियों, व्यवसायों, दायित्वों, कर्तव्यों तथा विशेषाधिकारों में स्पष्ट विभेद करता है।
● वामनावतार के तीन पगो के आख्यान का प्राचीनतम स्रोत ऋग्वेद है।
● ऋग्वेद में इंद्र के लिए 250 तथा अग्नि के लिए 200 री ऋचाओ की रचना की गई है।
प्राचीनतम इतिहास के साधन के रूप में वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान है। 

यजुर्वेद:

● सस्वर  पाठ के लिए मंत्रो तथा बलि के समय अनुपालन के लिए नियमो का संकलन कहलाता है। इसके पाठककर्ता को अधर्व्यू कहा जाता है।
● यजुर्वेद में यज्ञों के नियमो एवम विधि विधानों का संकलन मिलता है। 
● यह एक ऐसा वेद है जो गद्ध ओर पद्ध दोनो में है।

सामवेद:

● सामवेद में साम का अर्थ है गान । इस वेद में मुख्यतः यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाली ऋचाओ (मंत्रो) का संकलन है। इसके पाठककर्ता को उदृत कहते हैं।
● इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है।
यजुर्वेद तथा सामवेद में किसी भी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना का वर्णन नही मिलता।

अथर्वेद:

● अथर्वा ऋषि द्वारा रचित इस वेद में कुल 371 मंत्र तथा लगभग 6000 पद्ध है। इसके कुछ मंत्र ऋग्वेदिक मंत्रो से भी प्राचीन है। अथर्वेद कन्याओ के जन्म की निंदा करता है। 
● ऐतिहासिक द्रष्टि से अथर्वेद का महत्त्व इस बात में है कि इसमें सामान्य मनुष्यों के विचारों तथा अंधविस्वास का वर्णन मिलता है।
●प्रथ्वीसूक्त अथर्वेद का प्रतिनिधि सूक्त मन जाता है इसमें मानव जीवन के सभी पक्षो गृहनिर्माण, कृषि की उन्नति, व्यापारिक मार्गो की खोज, रोग निवारण, विवाह तथा प्रणय गीतों, राजसक्ति, राजा का चुनाव, शाप, वशीकरण, प्रायश्चित, आदि का विवरण दिया गया है। कुछ मंत्रो में जादू टोने का भी विवरण है। 
● अथर्वेद से परीक्षित को कुरुओं जा राजा कहा गया है। तथा कुरु देश की समृद्धि का अच्छा वरण मिलता है।
●इसमें सभा तथा समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद तथा सबसे बाद का वेद अथर्वेद है।

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