Monday, October 1, 2018

ब्रह्माण्ड के बारे में कुछ तथ्य

ब्रह्मांड के बारे में कुछ तथ्य

ब्रह्मांड के बारे में कुछ तथ्य:

● अस्तित्वमान द्रव्य एवं ऊर्जा के सम्मलित रूप को ब्रह्मांड कहते है
● दूसरे शब्दो मे सूक्ष्मतम अणुओ से लेकर महाकाय आकाश गंगाओं तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्मांड कहा जाता है।

ब्रह्मांड की उत्त्पत्ति से संबंधित प्रमुख सिद्धान्त:

1. महाविस्फोट सिद्धान्त(Big_Bang Theory)_ ऐब जॉर्ज लेमन्तेयर 
2. साम्यावस्था या सतत सृष्टि सिद्धान्त या स्थिर अवस्था संकल्पना - थॉमस गोल्ड एवं हर्मन बॉडी
3. दोलन सिद्धान्त- डॉ एलन संडेजा 
4. स्फीति सिद्धान्त- अलेन गुथ
● ब्रह्मांड की उत्पत्ति के संबंध में महाविस्फोट सिद्धान्त(Big-Bang Theory) सर्वाधिक मान्य सिद्धान्त है। इसका प्रतिपादन बेल्जियम के खगोलज्ञ एवं पादरी ऐब जॉर्ज लेमेंटयर नेे किया था। बाद में रोबर्ट बेगोनेर ने इस सिद्धान्त की व्याख्या की।

● महाविस्फोट सिद्धान्त के अनुसार:

1. अत्त्यधिक संकेन्द्रण के कारण बिंदु का आकस्मिक विस्फोट हुआ, जिसे महाविस्फोट ब्रह्मांडीय विस्फोट (Big-Bang) कहा गया। इस अचानक विस्फोट से पदार्थो का बिखराव हुआ, जिससे सामान्य पदार्थ निर्मित हुए। इसके अलगाव के कारण काले पदार्थ बने जिनके समूह से अनेक ब्रह्मांडीय पिंडो का सृजन हुआ। 
वेज्ञानिको का विश्वास है कि महाविस्फोट की घटना आज से 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी । ममहाविस्फोट के लगभग 10.5 अरब वर्ष पश्चात यानी आज से 4.5 अरब वर्ष पहले सौरमंडल का विकास हुआ। जिसमें ग्रहों तथा उपग्रहों का निर्मण हुआ इस प्रकार बिग बैंग परिघटना से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। और तभी से उसमे निरंतर विस्तार जारी है। इसके साक्ष्य के रूप में आकाशगंगाओ के बीच बढ़ती दूरी का साक्ष्य दिया जाता है।
● ब्रह्मांड के निरंतर विस्तारण के साक्ष्य जुटाने में एडविन हब्बल का योगदान उल्लेखनीय है। ब्रह्मांड के निरंतर विस्तारण के साक्ष्य के रूप में अंतरिक्ष मे सूक्ष्म तरंगो की उपस्थिति का पता चलना, अंतरिक्ष मे रेडशिफ्ट परिघटना का अवलोकन तथा आधुनिक अध्ययनों में सुपरनोवा का अंतरिक्ष मे विस्फोट होना भी ब्रह्मांड के विस्तार के साक्ष्य रूप में माना जा रहा है।
● ब्रह्मांड का व्यास 10^8 प्रकाशवर्ष है। ब्रह्मांड में अनुमानतः 100 अरब मंदाकिनी है। प्रत्येक मंदाकिनी में लगभग 100 अरब तारे है।
मंदाकिनी: तारो का ऐसा समुह, जो धुंधला सा दिखाई पड़ता है। तथा जो तारा निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत का गजपुंज है, मंदाकिनी कहलाता है। हमारी पृथ्वी की अपनी एक मंदाकिनी है, जिसे दुग्धमेला या आकाशगंगा कहा जाता है। अब तक ज्ञात इस मंदाकिनी का 80% भाग सर्पिल है। इस मंदाकिनी को सबसे पहले गैलीलियो ने देखा था। 
● आकाशगंगा की सबसे नजदीकी मंदाकिनी को देवयानी नाम दिया गया।
● नवीनतम ज्ञात मंदाकिनी है-  ड्वार्फ मंदाकिनी
ओरियन नेबुला हमारी आकाशगंगा के सबसे शीतल और चमकीले तारो का समूह है।

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