Monday, October 1, 2018

अर्थशास्त्र और अर्थव्यवस्था(Economics and Economy)

Arthashastr and arthvyavastha
अर्थशास्त्र मानव की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करता है। मानव द्वारा सम्पन्न वैसी सारी गतिविधियां जिनमे आर्थिक लाभ या हानि का तत्व विधमान हो आर्थिक गतिविधियां कही जाती है।
अर्थव्यवस्था एक अधूरा शब्द है अगर इसके पूर्व किसी देश या किसी क्षेत्र विशेष का नाम न जोड़ा जाए। वास्तव में हम जब किसी देश को उसकी समस्त क्रियाओ के संदर्भ में परिभाषित करते है, तो उसे अर्थव्यवस्था कहते है। आर्थिक क्रिया किसी देश के व्यापारिक क्षेत्र, घरेलू क्षेत्र तथा सरकार द्वारा दुर्लभ संशाधनों के प्रयोग, वस्तुओ तथा सेवाओ के उपभोग, उत्पादन के वितरण से संबंधित है।
निजी क्षेत्र और बाजार के सापेक्ष राज्य व सरकार की भूमिका के आधार पर अर्थव्यवस्था का वर्गीकरण तीन श्रेणियों में किया जाता है-

1.पूंजीवाद अर्थव्यवस्था:-

इस अर्थव्यवस्था में क्या उतपादन करना है, कितना उत्त्पादन करना है और उसे किस कीमत पर बेचना है, ये सब बाजार तय करता है। इसमें सरकार की कोई आर्थिक भूमिका नही होती है।
1776ईसवी में प्रकाशित ऐडम स्मिथ की किताब 'द वेल्थ ऑफ नेशन्स' को पूंजीवाद अर्थव्यवस्था का उदगम स्रोत माना जाता है

2.राज्य अर्थव्यवस्था:-

इस अर्थव्यवस्था की उत्त्पत्ति पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की लोकप्रियता के विरोध स्वरूप हुआ । इसमे उत्त्पादन, आपूर्ति और कीमत सबका फैसला सरकार द्वारा लिया जाता है। ऐसी अर्थव्यवस्था को केंद्रीकृत नियोजित अर्थव्यवस्था कहते है। जो गैर बजरी अर्थव्यवस्था होती है राज्य अर्थव्यवस्था की दो अलग अलग शैली नजर आती है। सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था कहते है। जबकि 1985 से पहले चीन की अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था कहा जाता था। 
पहली बार राज्य अर्थव्यवस्था सिद्धान्त जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने दिया था, जो एक व्यवस्था के तौर पहली बार 1917 ईसवी की बोल्शेविक क्रांति के बाद सोवियत संघ में नजर आयी और इसका आदर्श रूप चीन(1949ईं) में सामने आया।

3. मिश्रित अर्थव्यवस्था:-

इसमे कुछ लक्षण राज्य अर्थव्यवस्था के मौजूद होते है। तो कुछ लक्षण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के मौजूद होते है। यह दोनों का मिला जुला रूप है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद उपनिवेशवाद के चंगुल से निकले दुनिया के कई देशो ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया। इनमे भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल थे।
केंस ने सुझाब दिया था कि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था की ओर कुछ कदम बढ़ाना चाहिए जबकि प्रो. लांज ने कहा कि समाजवादी अर्थव्यवस्था को पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर कुछ कदम बढ़ाना चाहिए ।

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