Sunday, March 15, 2020

डॉप्लर प्रभाव/ Doppler's Effect


1.   डॉप्लर प्रभाव(Doppler's Effect in Sound)

जब कोई ध्वनि स्रोत अपने स्थान पर स्थिर रहते हुए ध्वनि उत्पन्न करता है तो उससे कुछ दुरी पर खड़े श्रोता को उसी आवृत्ति की सुनाई देती है जिस आवृति की ध्वनि स्रोत से उत्पन्न होती है परन्तु जब ध्वनि स्रोत अथवा श्रोता अथवा दोनों गति की अवस्था में होते है तो श्रोता को ध्वनि की आवृति बदली हुयी प्रतीत होती है यदि इस गति के फलस्वरूप स्रोत तथा श्रोता के बीच की दूरी घट रही है तो श्रोता को स्रोत की आवृति बढ़ी हुयी प्रतीत होती है इसके विपरीत यदि उनके बीच की दूरी बढ़ रही है तो श्रोता को आवृति घटी हुई प्रतीत होगी
"स्रोत तथा श्रोता की सापेक्ष गति के कारण स्रोत की आवृति में होने वाले आभासी परिवर्तन को डॉप्लर प्रभाव कहते है "

उदाहरण : जब हम प्लेटफार्म पर खड़े होते है तथा दूर से सीटी देता हुआ इंजन प्लेटफार्म की और आता है तो हमे सीटी की ध्वनि तीक्ष्ण अर्थात ऊंची आवृति की प्रतीत होती है परन्तु जब इंजन प्लेटफार्म को पार करके दूर जाता है तो वही ध्वनि हमे मोटी अर्थात नीची आवृति की प्रतीत होती है

डॉप्लर प्रभाव के अनुप्रयोग : डॉप्लर प्रभाव का उपयोग वायु में उड़ते विमान के वेग का अनुमान लगाने में किया जाता है रेडार स्टेशन से वायु में उड़ते विमान कीओर रेडार तरंगे भेजी जाती है तथा विमान से परावर्तित होकर लौटने वाली तरंगे स्टेशन पर प्राप्त की जाती है यदि विमान रेडार स्टेशन स्टेशन की और आ रहा है तो विमान से परावर्तित रेडार तरंगो की आवृति बढ़ जाती है और यदि वह स्ततिओ से दूर जा रहा है तो परावर्तित तरंगो की आवर्ती घट जाती है स्टेशन से विमान की और भेजी गयी तथा विमान से स्टेशन पर प्राप्त की गयी तरंगो कीआवृति के अंतर से विमान के वेग की गणना की जा सकती है ठीक इसी प्रकार जल के भीतर चलती पनडुब्बी का वेग ज्ञात किया जा सकता है इस प्रकार की गणनाओ का युद्ध के दिनों में बहुत महत्त्व होता है



























0 comments: