Thursday, April 9, 2020

प्रत्यास्थता (Elasticity)किसे कहते है,प्रत्यास्था की सीमा (Limit of Elasticity),प्रतिबल , विकृति तथा हुक का नियम:

                                        
 प्रत्यास्थता (Elasticity): 
जब हम किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाते है तो वस्तु का आकार अथवा रूप अथवा दोनों ही बदल जाते है इस बल को 'विरूपक बल 'कहते है इसे हटा लेने पर वस्तु फिर अपना प्रारंभिक आकार अथवा रूप ले लेती है उदहारण के लिए , जब हम रबड़ की डोरी के एक सिरे को एक हाथ में पकड़ कर दूसरे सिरे को दूसरे हाथ से खींचते है तो डोरी की लम्बाई बढ़ जाती है , परन्तु छोड़ देने पर डोरी फिर अपनी पहली लम्बाई ले लेती है पदार्थ के इस गुण को प्रत्यास्थता कहते है तथा जिस वस्तु में यह गुण पाया जाता है उसे प्रत्यास्थ वस्तु कहते है अतः
                      प्रत्यास्थता किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल के द्वारा उत्पन्न आकार अथवा रूप के परिवर्तन का विरोध करती है और जैसे ही विरूपक बल हटा लिया जाता है वस्तु अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है 
जो वस्तुए विरूपक बल के हटा लिए जाने पर अपनी पूर्व अवस्था को पूर्णतः प्राप्त कर लेती है वे पूर्ण प्रत्यास्थ कहलाती है इसके विपरीत जो वस्तुए विरूपक बल को हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लोटती बल्कि सदैव के लिए विरूपित हो जाती है वे पूर्ण सुघट्य कहलाती है वास्तव में कोई भी वस्तु न तो पूर्ण प्रत्यास्थ होती है और न पूर्ण सुघट्य , बल्कि सभी वस्तुए इन दोनों सीमाओं के भीतर ही होती है फिर भी मोटे तोर पर क्वार्टज को पूर्ण प्रत्यास्थ वस्तु तथा मोम व् गीली मिट्टी को पूर्ण सुघट्य माना जाता है
                                 
प्रत्यास्था की सीमा (Limit of Elasticity): प्रत्यास्थ वस्तुए विरूपक बल के हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है परन्तु वस्तुओ में यह गुण विरूपक बल के एक विशेष मान तक ही रहता है यदि विरूपक बल का मान बढ़ाते जाए तो एक अवस्था ऐसी आएगी जब बल को हटा लेने पर वस्तु अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लौटेगी | उदाहरण के लिए , यदि किसी दृढ़ आधार से लटके तार के निचले सिरे पर भार लटकाया जाए तो तार लम्बाई में बढ़ जाता है भार को हटा लेने पर तार पुनः अपनी प्रारंभिक लम्बाई में आ जाता है यदि लटकाये गये भार को धीरे धीरे बढ़ाया जाए तो एक अवस्था ऐसी आ जाती है कि भार हटा लेने पर तार अपनी प्रारंभिक लम्बाई में नहीं लौटता बल्कि उसकी लम्बाई सदैव के लिए बढ़ जाती है इस प्रकार उसका प्रत्यास्थता का गुण नष्ट हो जाता है किसी पदार्थ पर लगाए गये विरूपक बल की उस सीमा को जिसके अन्तर्गत पदार्थ का प्रत्यास्थता का गुण विद्यमान रहता है उस पदार्थ की प्रत्यास्थता की सीमा कहते है

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प्रतिबल , विकृति तथा हुक का नियम:
                   प्रतिबल (Stress): जब किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाकर उसके आकार अथवा रूप में परिवर्तन किया जाता है तो उस वस्तु की प्रत्येक काट पर , बाह्य बल के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में एक आन्तरिक प्रतिक्रिया -बल उत्पन्न हो जाता है जो वस्तु को पूर्व अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है साम्यावस्था में वस्तु की अनुप्रस्थ-काट के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आन्तरिक प्रतिक्रिया-बल को प्रतिबल कहते है 
परन्तु चूँकि सन्तुलन की अवस्था में आन्तरिक प्रतिक्रिया-बल का मान बाह्य बल के बराबर है , अतः यदि किसी वस्तु के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल A पर बाह्य बल F लगाया गया है तो
                                                                         
                                                           प्रतिबल = F/A
प्रतिबल का मात्रक न्यूटन/वर्ग मीटर है
वस्तु में उत्पन्न प्रतिबल इस बात पर निर्भर करता है की वस्तु पर बाह्य बल किस प्रकार लगाया है इस आधार पर प्रतिबल तीन प्रकार के होते है
1. अनुदैर्ध्य  प्रतिबल Longitudinal stress
2.अभिलम्ब प्रतिबल Normal stress
3. स्पर्श-रेखीय प्रतिबल Tangentialstress
                     विकृति (Strain): जब किसी वस्तु पर बाह्य बल लगने से वस्तु के आकार अथवा रूप में परिवर्तन हो जाता है तब वस्तु विकृत अवस्था में कही जाती है वस्तु के एकांक आकार में होने वाले परिवर्तन को विकृति कहते है जैसे किसी तार पर भार लटकाने से उसकी लम्बाई बढ़ जाती है लम्बाई में होने वाली वृद्धि तथा प्रारंभिक लम्बाई के अनुपात को विकृति कहते है चूँकि विकृति एक अनुपात है अतः इसका कोई मात्रक नही होता है
       वस्तु पर विरूपक बल लगने के अनुसार विकृति भी तीन प्रकार की होती है
1. अनुदैर्ध्य विकृति Longitudinal strain
2. आयतन विकृति Volume strain
3. अपरूपण विकृति Shearing strain
                     हुक का नियम (Hook's Law): सन 1679 में राबर्ट हुक ने यह बताया कि लघु विकृतियों की सीमा के भीतर , पदार्थ में उत्पन्न विकृति पदार्थ पर कार्यरत प्रतिबल के अनुक्रमानुपाती होती है | किसी दी हुई वस्तु के पदार्थ के लिए प्रतिबल तथा विकृति का अनुपात एक नियतांक होता है इसे प्रत्यास्थता गुणांक E कहते है 
                                                                
                                                          E= प्रतिबल /विकृति 

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